स्त्री मानवाधिकार एवं भारतीय परम्परा: संस्कृत वांग्मय के आधार पर

लेखक

  • अनिता नैन

सार

ये युक्ति प्रायः नारी के गौरव का गुणगान करने में प्रयुक्त होती है | यह इस बात का संकेत है कि भारतीय परम्परा में नारी को सम्मानजनक स्थान प्राप्त रहा है | 

प्रकाशित

2022-09-11

अंक

खंड

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